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Wednesday, 30 January 2019

bharat ka bhugol भारत के भौतिक प्रदेश Physical territory of india

January 30, 2019 0

भौतिक प्रदेश अर्थात जहां हम रह रहे हैं स्थलमंडल पर तो यहाँ उपस्थित पर्वत ,पहाड़ , पठार ,वन ,वनस्पति आदि का किसी क्षेत्र विशेष मे अध्यन
भौतिक दृष्टि से भारत को मुख्य रूप से 6 भागो में बांटा गया हैं

महान हिमालय
उत्तर का विशाल मैदान
प्रायद्वीपीय पठार 
तटीय मैदान 
भारत का मरुस्थल  
द्वीप समूह 

महान हिमालय

भारत के उत्तर में हिमालय की पर्वतमाला नए और मोड़दार पहाड़ों से बनी है। यह पर्वतश्रेणी कश्मीर से अरुणाचल तक लगभग 2500 KM तक फैली हुई है!
हिमालय की चौड़ाई 200 से 400 km हैं
हिमालय में मुख्य 3 पहाड़िया हैं
1.हिमालय पर्वत श्रेणी
2.ट्रांस हिमालय
3.पूर्वांचल की पहाड़िया

हिमालय पर्वत श्रेणी
हिमालय की पर्वत श्रेणियों को भी तीन भागो में बांटा गया है
1.वृहद् हिमालय या हिमाद्री
2.निम्न हिमालय  या हिमाचल हिमालय
3.शिवालिक हिमालय

1.वृहद् हिमालय या हिमाद्री
इसकी औसत ऊँचाई 4900मी० है यह हिमालय के तीनो भाग में सबसे ऊँचा है! माउंट एवरेस्ट इसी भाग में स्थित है!
माउंट एवरेस्ट, नेपाल में हैं जिसकी ऊँचाई 8850 मी० हैं भारत में इसकी सबसे ऊँची चोटी कंचनजंघा,( सिक्किम) हैं
जिसकी ऊँचाई 8586 मी० हैं हिमाद्री हिमालय ज़्यादातर बर्फ से ढँका होता है
हिमाद्रि के अंचल में, धौलगिरी, नंगा पर्वत, नंदादेवी, अन्नपूर्णा जैसे ऊँचे ऊँचे पर्वत हैं।
इस भाग में प्रमुख दर्रे जोजिला, कारा कोरम, नाथुला आदि हैं

2.निम्न हिमालय  या हिमाचल हिमालय
इसकी औसत ऊँचाई 3600 से 4600 मी० तक है तथा
इसकी चौड़ाई 60 से 80 किमी० तक है!
टूरिस्ट सेंटर- शिमला, मंसूरी, नैनीताल इसी रेंज में स्थित है
हिमांचल पर्वत श्रेणी में ही कांगड़ा और कुल्लू प्रसिद्ध घाटिया हैं!


3.शिवालिक हिमालय
हिमालय का सबसे दक्षिणी भाग इसे शिवालिक भी कहते है! इसकी औसत ऊँचाई 900 से 1500 मी० है!

ट्रांस हिमालय
यह महान हिमालय के उत्तर में और तिब्बत के दक्षिण में स्थित है.
इसमें कराकोरम, लद्दाख, जास्कर, और कैलाश पर्वत श्रेणियां प्रमुख है.
ट्रांस हिमालय में भारत कि सबसे ऊँची और विश्व कि दूसरी सबसे ऊँची चोटी गोडविन ऑस्टिन (K-2) 8622 मी. हैं जो कराकोरम श्रेणी में स्थित है.
सिन्धु, सतलुज, और ब्रम्हपुत्र इस श्रेणी कि प्रमुख नदियाँ है.
भारत का सबसे बड़ा हिमनद "बाल्टेरों" इसी में स्थित है.


पूर्वांचल की पहाड़िया
यह भारत-म्यांमार सीमा पर उत्तर से दक्षिण अर्ध-चंद्रकार रूप में विस्तृत है. इस श्रेणी में नागा, पटकोई, और लुसाई पहाड़ियां प्रमुख है.

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Monday, 28 January 2019

Adhunik Bharat ka itihas यूरोपीय कम्पनियों का आगमन पुर्तगीज(पुर्तगाली)

January 28, 2019

यूरोपीय कम्पनियों का आगमन पुर्तगीज(पुर्तगाली) adhunik Bharat ka itihas


मुख्य मार्ग : 1 फारस की खाड़ी से इराक -} तुर्की -} भूमध्य सागर -} वेनिस (इटली ) स्विज़रलैंड (जेनेवा)
2. लाल सागर -} मिस्र -} भूमध्यसागर –} वेनिस (इटली ) स्विज़रलैंड (जेनेवा)
3.उतरी पच्छिमी सीमा प्रान्त -} रूस -} बाल्टिक सागर -} जर्मनी और यूरोपीय देश

व्यापर की स्थिति
एशियाई व्यापर अरबवासियों के हाथो में
यूरोपीय व्यापर इतालियो के हाथो में था

1450 के बाद तुर्कों का कुस्तुन्तुनिया पर अधिकार हो गया था तो पूर्व में जाने के लिए जो फारस की खाड़ी और लाल सागर वाले मार्ग थे यूरोपियो के लिए बंद हो गए थे इसलिए यूरोप के व्यापरियों को जरुरत थी नए मार्ग की जो सुरक्षित हो उस समय स्पेन और पुर्तगाल नए नए राष्ट्र बने थे इन्होने विज्ञानं तकनिकी में विकास किया
तत्पशत 1494 में कोलम्बस नाम के स्पेन व्यापारी ने भारत को खोजने के चक्कर में अमेरिका को खोज निकाला
फिर 1498 में कोवास्कोडिगामा ने उतमासा अंतरिम का चक्कर लगाते हुए भारत को खोजा
यूरोप वासियों का आने का कारण
गर्म मसालों का व्यापर करना और आर्थिक लाभ लेना
और उस समय पूर्वी राष्ट्र बहुत धनि होते थे खासकर भारत और इंडोनेसिया

यूरोपीय कम्पनियों का आगमन पुर्तगीज(पुर्तगाली)

पुर्तगीज सर्वप्रथम भारत आये
पुर्तगीज उतमासा अंतरीप से होते हुए
पुर्तगीज अब्दुल मनिद की सहायता से भारत आये
पुर्तगीज 17 मई 1498 ई को केरल के कालीकट बन्दरगाह
प्रथम व्यक्ति वास्कोडिगामा भारत आया
जमोरिन द्वारा वास्कोडिगामा का स्वागत किया गया
वास्कोडिगामा प्रथम यात्रा के दौरान मसाले और जड़ी बूटिया ले गया
इस यात्रा द्वारा वास्कोडिगामा को खर्च निकाल कर 60 गुना लाभ हुआ
इस व्यापार के बाद लिस्बन पुरे यूरोपीय व्यापार का केंद्र बन गया था
उस समय पुर्तगाल का शासक मैन्युअल प्रथम था जिसने “वाणिज्य के प्रधान” की उपाधि धारण की
द्वितीय पुर्तगाली अभियान 1500 ई में “पेड्रो अल्व्रेज” के नेतृत्व में
1502 में वास्कोडिगामा पुनः भारत आया
1503 में पुर्तगालियो ने कोचीन में पहली फैक्ट्री लगाई
1505 में कनूर में दूसरी फैक्ट्री
1505 में फ्रांसिस्को डी अल्मीडा(1505-09) प्रथम पुर्तगाली गवर्नर भारत आया
अल्मीडा की निति “ब्लू वाटर पालिसी”
1509 में अल्फ़ान्सो डी अलबुकर्क(1509-15) दूसरा गवर्नर बन कर आया इसी के समय पुर्तगालियो ने गोवा जीता 1510 में
1515 तक पुर्तगाली भारत की सबसे सबल जल शक्ति बन चुके थे we खुद को समुद्र के स्वामी कहते थे
अर्थात उनके पास सामुद्रिक साम्राज्य था जिसे वे “एस्तादो द इंडिया“ कहते थे
1530 में इन्होने अपना कार्यालय कोचीन से गोवा स्थान्तरित क्र दिया तथा गोवा पुर्तगालो की स्थाई राजधानी बन गया इस समय गवर्नर था नीनो डी कुन्हा (1529-38)
भारत के पूर्वी तट पर अधिकार 1534-35 में ही हुआ कुन्हा के समय
1571 में पुर्तगाली एशियाई साम्राज्य के तीन कमान थे
1.अफ्रीका समुद्र पर –मोजाम्बिक के गवर्नर की नियुक्ति
2.भारत और फारस की खाड़ी प्रदेशो के लिए गोवा के गवर्नर की
3.दक्षिण पूर्वी एशियाई देशो के लिए -मल्लका के गवर्नर को सोंपा
पुर्तगालियो का मुख्य हथियार परमिट था
अर्थात समुद्र के रस्ते किसी व्यापारी को गुजरना पड़ता तो पुर्तगालो से परमिट लेना पड़ता था एशिया के व्यापरी बाध्य थे परमिट लेने में
मुगल बादशाह खुद भी सुरत से मोरवा जाने के लिए परमिट लेते थे

पुर्तगाली पतन के कारण

धार्मिक असहिषणुता –भारतीय शक्तियों से शत्रुता
दूसरा कारण चुपके चुपके व्यापर करना
ब्राजील का पता लग गया
और मुख्य कारण दूसरी यूरोपीय कम्पनिया


पुर्तगाली अधिपत्य के परिणाम

धार्मिक परिणाम : धर्म परिवर्तन को बढ़ावा ,गोवा में मन्दिर नष्ट किये ,तथा ईसाई धर्म न्यायालय की स्थापना
आर्थिक परिणाम: जापान के साथ व्यापर शुरू ,पुर्तगीज अमेरिका से तम्बाकू ,आलू और मक्का लाये ,
सामाजिक परिणाम : भारत में पप्रिंटिंग प्रेस (छपाई) की शुरुआत

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भारतीय संविधान अनुच्छेद 36 से 51 Indian Constitution

January 28, 2019
भाग -4 राज्य के निति निदेशक तत्व



अनुच्छेद 36:- राज्य शब्द परिभाषित- राज्य का अर्थ वही हैं जो अनुच्छेद 12 में हैं



अनुच्छेद 37:- निति निदेशक तत्व वाद योग्य नहीं हैं राज्य नीतियाँ बनाते समय इन्हें ध्यान में रखेगा !


अनुच्छेद 38:- राज्य सभी लोगों को सामाजिक आर्थिक राजनितिक न्याय उपलब्ध करवायेगा!


अनुच्छेद 39:- लोक कल्याणकारी नीतियाँ
(a)राज्य सभी स्त्री पुरुषों को आजीविका के लिए सामान अवसर उपलब्ध करवायेगा!
(b)राज्य मानवीय और भौतिक संसाधनों का इस प्रकार वितरण करेगा की सभी लोगों का कल्याण हो!
(c)राज्य राज्य आर्थिक संसाधनों का वितरण इस प्रकार करेगा की उनका केन्द्रीकरण नही हों
(d)समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जायेगा
(e)राज्य स्त्रियों और पुरुषों को ऐसा कार्य नही करने देगा की जो उनके स्वास्थ्य के खिलाफ हो
(f)राज्य बच्चो को ऐसा वातावरण उपलब्ध करवायेगा जिससे उनका व्यक्तित्व का विकास हो


अनुच्छेद 39क: राज्य सभी लोगों को समान न्याय , निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध करवायेगा !


अनुच्छेद 40: राज्य ग्रामपंचायतो का गठन करेगा !


अनुच्छेद 41: राज्य सभी लोगों को काम,शिक्षा, और लोक व्यवस्था उपलब्ध करवायेगा!


अनुच्छेद 42: राज्य सभी लोगो को मानवोचित दशाएं उपलब्ध करवायेगाऔर प्रसूति सहायता उपलब्ध करवायेगा !


अनुच्छेद 43: राज्य सभी लोगों को जीवन निर्वाह योग्य वेतन उपलब्ध करवायेगा !


अनुच्छेद 44: राज्य सामान नागरिक सहिंता की स्थापना करेगा !


अनुच्छेद 45: राज्य 6 वर्ष से कम बालकों के लिए निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध करवायेगा !



अनुच्छेद 46: राज्य अनुसूचित जाती और जनजाति व समाज के दुर्बल वर्ग के लिए शिक्षा की व्यवस्था करेगा !



अनुच्छेद 47: राज्य के प्राथमिक कर्तव्यो का उल्लेख हैं राज्य मादक पदार्थो पर रोक लगाएगा !
(a) राज्य लोगो के जीवन स्तर में सुधार करेगा !
(b) राज्य लोगो के पोषाहार में सुधार करेगा!
(c) राज्य लोगो के स्वास्थ्य में सुधार करेगा!



अनुच्छेद 48: राज्य कृषि व पशुपालन में सुधार हेतु उन्नत तकनिकी का उपयोग करेगा , राज्य पशुओं विशेषकर गौ हत्या पर रोक लगाएगा !


अनुच्छेद 48A: राज्य पर्यावरण का सरंक्षण करेगा व वन और वन्यजीवों की भी रक्षा करेगा!



अनुच्छेद 49: राज्य का कर्तव्य हैं की वो हमारे विरासतों , एतिहासिक स्मारकों और राष्ट्रिय महत्व के स्थानों को सरंक्षण प्रदान करे !



अनुच्छेद 50: राज्य कार्यपालिका व न्यायपालिका को पृथक करेगा !



अनुच्छेद 51: भारत का विदेश निति का आधार
(a) भारत अंतराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा को बढ़ावा देगा
(b)भारत सभी राष्टों के मध्य सम्मानजनक और न्यायसंगत व्यवहार बढ़ावा देगा !
(c)भारत अंतराष्ट्रीय संधि और समझोते की पालना को बढ़ावा देगा !
(d) भारत चाहता हैं अंतराष्ट्रीय विवादों का समाधान मध्यस्था से हो !

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Saturday, 26 January 2019

भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेद Constitution important article

January 26, 2019

अनुच्छेद 1 : संघ व राज्य क्षेत्र :- India जो की भारत हैं  राज्यों का संघ होगा ना की राज्यों का समूह

अनुच्छेद 2 : नए राज्यों का प्रवेश : भारत के राज्य क्षेत्र में नए राज्यों का प्रवेश अथवा विदेशी राज्य क्षेत्र को भारत में मिलाना

अनुच्छेद 3 : राज्यों के नाम , स्थान , सीमा , क्षेत्र में परिवर्तन

अनुच्छेद 4 : अनुच्छेद 3 व 4 में परिवर्तन करते समय अनुच्छेद 368 की प्रक्रिया से संसोधन नही करना होगा

अनुच्छेद 5 : संविधान निर्माण के समय भारत की नागरिकता

अनुच्छेद 6 : पाकिस्तान से भारत आने वाले व्यक्ति की नागरिकता

अनुच्छेद 7 : 1 मार्च 1947 के बाद पाकिस्तान गया हो और वापस भारत में रहने के बाद नागरिकता

अनुच्छेद 8 : विदेशो में रह रहे भारतीय मूल के नागरिकों की नागरिकता के संबध में

अनुच्छेद 9 : अपनी इच्छा से विदेशी राज्य की नागरिकता अर्जित करने पर भारत से समाप्त नागरिकता

अनुच्छेद 10 : कब कब नागरिकता के अधिकार बने रहेंगे

अनुच्छेद 11 : संसद को अधिकार नागरिकता के संबध में कानून बनाने का

अनुच्छेद 12 : राज्य शब्द को परिभाषित किया गया हैं

अनुच्छेद 13 : विधि शब्द परिभाषित और मूल अधिकारों के अल्पीकरण करने वाली विधियाँ

अनुच्छेद 14 : विधि के समक्ष समानता विधियों का सामान सरंक्षण

अनुच्छेद 15 : जाती ,मूलवंश, धर्म . रंग और लिंग के आधार पर भेदभाव निषेध

अनुच्छेद 16 : लोक नियोजन के विषय में अवसर की समानता

अनुच्छेद 17 : अश्प्र्यता का अंत

अनुच्छेद 18 : उपाधियों का अंत

अनुच्छेद 19 : 6 प्रकार की स्वतंत्रता

a.भाषण व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
b.सभा करने की स्वतंत्रता
c.संघ व संगठन बनाने की
d.भारत में कहीं पर घुमने फिरने की स्वतंत्रता
eभारत में कहीं पर रहने व निवास करने की स्वतंत्रता
f.भारत के राज्य क्षेत्र में कहीं पर व्यापर करने की स्वतंत्रता

अनुच्छेद 20 :अपराध व दोष सिद्धि के सम्बद्ध में सरंक्षण
a.अपराध के समय जो कानून हो उसी कानून के तहत सजा होगी
b.एक ही अपराध के लिए एक ही सजा होगी
c.खुद के खिलाफ गवाही देने के लिए बाध्य नही किया जायेगा

अनुच्छेद 21: प्राण व दैहिक स्वतंत्रता यां जीवन जीने का अधिकार

अनुच्छेद 22: गिरफ्तारी के विरुद्ध सरंक्षण

a.गिरफ्तारी के कारण जानने का अधिकार
b.अपने अनुसार विधि सलाहकार चुनने का अधिकार
c.24 घंटे के अन्दर नजदीकी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जायेगा
अनुच्छेद 23: बलात श्रम,सागडी प्रथा , बंधुआ मजदूरी व मानव व्यापर पर रोक
अनुच्छेद 24: बाल श्रम ( 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चो से कारखानों में कार्य करवाने पर प्रतिबन्ध
अनुच्छेद 25: किसी भी व्यक्ति को अपने धर्म को मानने उसके अनुरूप आचरण करने , उसका प्रचार प्रसार करने व अंतकरण की स्वतंत्रता होगी
अनुच्छेद 26: किसी भी व्यक्ति को धार्मिक संस्था स्थापित करने और उसका प्रबन्धन करने का अधिकार होगा
अनुच्छेद 27: किसी एक धर्म को बढ़ावा देने के लिए किसी भी व्यक्ति को धार्मिक कर देने के लिए बाध्य नही किया जायेगा
अनुच्छेद 28: किसी भी शैक्षणिक संस्थान में धार्मिक शिक्षा नही दी जाएगी
अनुच्छेद 29: अल्पसंख्यको के हितों की रक्षा उनकी भाषा ,लिपि , व संस्कृति को बचाए रखने का अधिकार
अनुच्छेद 30: सभी अल्पसंख्यकों को अपनी धार्मिक शिक्षण संस्थानों को खोलने व उनका सञ्चालन और प्रबन्धन करने का अधिकार होगा
अनुच्छेद 31 : सम्पति का अधिकार था 42वें संविधान संसोधन के तहत समाप्त कर दिया और विधिक अधिकार बना दिया
अनुच्छेद 31A

अनुच्छेद 31B

अनुच्छेद 31C

अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचारों का अधिकार न्यायायल को 5 प्रकार की रिट जारी करने का अधिकार
a.बंदी प्रत्यक्षीकरण -हेबियस कारपस ( उपस्थित किया जाये )
b.परमादेश -मांडामस (हम आदेश देते हैं
c.प्रतिषेद- प्रोहिबिशन (आपके अधिकार क्षेत्र में नही हैं )
d.उत्प्रेषण- सेरिसरी( निम्न न्यायालयों को आदेश
e.अधिकार पृछा -को वारंटो (किस अधिकार से

अनुच्छेद 33: सैन्य , पुलिस b IB के लिए संसद कानून बनाकर मूल अधिकारों में कमी कर सकती हैं

अनुच्छेद 34: मार्शल लॉ लग जाने पर मूल अधिकारों में हुई कमी को संसद कानून बनाकर क्षतिपूर्ति कर सकती हैं

अनुच्छेद 35: मूल अधिकारों के संदर्भ में कानून बनाने का अधिकार केवल संसद को हैं किसी भी विधान मंडल को नहीं हैं


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