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Monday, 11 February 2019

1909 का भारत शासन अधिनियम

February 11, 2019 0

1909 का मार्ले-मिन्टो सुधार अधिनियम

इस अधिनियम को मार्ले-मिन्टो सुधर अधिनियम भी कहा जाता हैं !
क्योंकि उस समय मार्ले भारत सचिव था !
और
मिन्टो तत्कालीन भारत का वायसराय था,
इसलिए इस अधिनियम को मार्ले-मिंटो सुधार अधिनियम कहा जाता हैं !

इस अधिनियम मुख्य रूप से 6 प्रावधान थे !
1. इस अधिनियम के तहत केन्द्रीय और प्रांतीय विधानपरिषद में काफी वृद्धि की गयी केन्द्रीय परिषद् में विधान परिषदों की संख्या 16 से 60 कर दी गयी !
2. इस अधिनियम के तहत विधान परिषदों की शक्तियों में वृद्धि की गयी अब सदस्यों को वार्षिक बजट पर बहस के साथ साथ अपने विचार रख सकते थे प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकते थे प्रश्न पूछ सकते थे!
3. इस अधिनियम के तहत पहली बार भारतियों को वायसराय की कार्यपालिका परिषद् में शामिल किया गया सत्येन्द्र प्रसाद सिन्हा वायसराय की कार्यपालिका के प्रथम भारतीय सदस्य बने!
4. इस अधिनियम के तहत साम्प्रदायिक निर्वाचन की नीव रखी जाती हैं मुस्लिम सदस्यों का चुनाव मुस्लिम मतदाता हि करेगे लार्ड मिन्टो को साम्प्रदायिक निर्वाचन का जनक माना जाता हैं



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Monday, 4 February 2019

1892 के भारत शासन अधिनियम 1892 act in hindi

February 04, 2019 0
1892 के भारत शासन अधिनियम में मुख्य तीन प्रावधान थे
1.अप्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली की शुरुआत
2.विधान परिषद् के कार्यों में वृद्धि की गयी बजट पर बहस होना प्रारंभ हो गयी
3.इसमें केन्द्रीय विधानपरिषद में भारतीयों की संख्या कम से कम 10 होगी और अधिकतम 16 होगी !

कथन :- सुरेन्द्रनाथ बनर्जी ने कहा था की इस अधिनियम के द्वारा भारत में संसदीय शासन प्रणाली की शुरुआत मानी जाएगी

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Monday, 28 January 2019

Adhunik Bharat ka itihas यूरोपीय कम्पनियों का आगमन पुर्तगीज(पुर्तगाली)

January 28, 2019

यूरोपीय कम्पनियों का आगमन पुर्तगीज(पुर्तगाली) adhunik Bharat ka itihas


मुख्य मार्ग : 1 फारस की खाड़ी से इराक -} तुर्की -} भूमध्य सागर -} वेनिस (इटली ) स्विज़रलैंड (जेनेवा)
2. लाल सागर -} मिस्र -} भूमध्यसागर –} वेनिस (इटली ) स्विज़रलैंड (जेनेवा)
3.उतरी पच्छिमी सीमा प्रान्त -} रूस -} बाल्टिक सागर -} जर्मनी और यूरोपीय देश

व्यापर की स्थिति
एशियाई व्यापर अरबवासियों के हाथो में
यूरोपीय व्यापर इतालियो के हाथो में था

1450 के बाद तुर्कों का कुस्तुन्तुनिया पर अधिकार हो गया था तो पूर्व में जाने के लिए जो फारस की खाड़ी और लाल सागर वाले मार्ग थे यूरोपियो के लिए बंद हो गए थे इसलिए यूरोप के व्यापरियों को जरुरत थी नए मार्ग की जो सुरक्षित हो उस समय स्पेन और पुर्तगाल नए नए राष्ट्र बने थे इन्होने विज्ञानं तकनिकी में विकास किया
तत्पशत 1494 में कोलम्बस नाम के स्पेन व्यापारी ने भारत को खोजने के चक्कर में अमेरिका को खोज निकाला
फिर 1498 में कोवास्कोडिगामा ने उतमासा अंतरिम का चक्कर लगाते हुए भारत को खोजा
यूरोप वासियों का आने का कारण
गर्म मसालों का व्यापर करना और आर्थिक लाभ लेना
और उस समय पूर्वी राष्ट्र बहुत धनि होते थे खासकर भारत और इंडोनेसिया

यूरोपीय कम्पनियों का आगमन पुर्तगीज(पुर्तगाली)

पुर्तगीज सर्वप्रथम भारत आये
पुर्तगीज उतमासा अंतरीप से होते हुए
पुर्तगीज अब्दुल मनिद की सहायता से भारत आये
पुर्तगीज 17 मई 1498 ई को केरल के कालीकट बन्दरगाह
प्रथम व्यक्ति वास्कोडिगामा भारत आया
जमोरिन द्वारा वास्कोडिगामा का स्वागत किया गया
वास्कोडिगामा प्रथम यात्रा के दौरान मसाले और जड़ी बूटिया ले गया
इस यात्रा द्वारा वास्कोडिगामा को खर्च निकाल कर 60 गुना लाभ हुआ
इस व्यापार के बाद लिस्बन पुरे यूरोपीय व्यापार का केंद्र बन गया था
उस समय पुर्तगाल का शासक मैन्युअल प्रथम था जिसने “वाणिज्य के प्रधान” की उपाधि धारण की
द्वितीय पुर्तगाली अभियान 1500 ई में “पेड्रो अल्व्रेज” के नेतृत्व में
1502 में वास्कोडिगामा पुनः भारत आया
1503 में पुर्तगालियो ने कोचीन में पहली फैक्ट्री लगाई
1505 में कनूर में दूसरी फैक्ट्री
1505 में फ्रांसिस्को डी अल्मीडा(1505-09) प्रथम पुर्तगाली गवर्नर भारत आया
अल्मीडा की निति “ब्लू वाटर पालिसी”
1509 में अल्फ़ान्सो डी अलबुकर्क(1509-15) दूसरा गवर्नर बन कर आया इसी के समय पुर्तगालियो ने गोवा जीता 1510 में
1515 तक पुर्तगाली भारत की सबसे सबल जल शक्ति बन चुके थे we खुद को समुद्र के स्वामी कहते थे
अर्थात उनके पास सामुद्रिक साम्राज्य था जिसे वे “एस्तादो द इंडिया“ कहते थे
1530 में इन्होने अपना कार्यालय कोचीन से गोवा स्थान्तरित क्र दिया तथा गोवा पुर्तगालो की स्थाई राजधानी बन गया इस समय गवर्नर था नीनो डी कुन्हा (1529-38)
भारत के पूर्वी तट पर अधिकार 1534-35 में ही हुआ कुन्हा के समय
1571 में पुर्तगाली एशियाई साम्राज्य के तीन कमान थे
1.अफ्रीका समुद्र पर –मोजाम्बिक के गवर्नर की नियुक्ति
2.भारत और फारस की खाड़ी प्रदेशो के लिए गोवा के गवर्नर की
3.दक्षिण पूर्वी एशियाई देशो के लिए -मल्लका के गवर्नर को सोंपा
पुर्तगालियो का मुख्य हथियार परमिट था
अर्थात समुद्र के रस्ते किसी व्यापारी को गुजरना पड़ता तो पुर्तगालो से परमिट लेना पड़ता था एशिया के व्यापरी बाध्य थे परमिट लेने में
मुगल बादशाह खुद भी सुरत से मोरवा जाने के लिए परमिट लेते थे

पुर्तगाली पतन के कारण

धार्मिक असहिषणुता –भारतीय शक्तियों से शत्रुता
दूसरा कारण चुपके चुपके व्यापर करना
ब्राजील का पता लग गया
और मुख्य कारण दूसरी यूरोपीय कम्पनिया


पुर्तगाली अधिपत्य के परिणाम

धार्मिक परिणाम : धर्म परिवर्तन को बढ़ावा ,गोवा में मन्दिर नष्ट किये ,तथा ईसाई धर्म न्यायालय की स्थापना
आर्थिक परिणाम: जापान के साथ व्यापर शुरू ,पुर्तगीज अमेरिका से तम्बाकू ,आलू और मक्का लाये ,
सामाजिक परिणाम : भारत में पप्रिंटिंग प्रेस (छपाई) की शुरुआत

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Wednesday, 23 January 2019

बंगाल के गवर्नर 1757-1773 adhunik bharat ka itihas

January 23, 2019

बंगाल के गवर्नर 1757-1773

1757 में प्लासी के युद्ध से ही ब्रिटिश ईस्ट इंडिया की कंपनी का राजनैतिक हस्तक्षेप माना जाता हैं ,
1773 के रेगुलेटिंग एक्ट से पहले गवर्नर जनरल नही केवल गवर्नर कहलाता था और शासन बंगाल पर था तो बंगाल का गवर्नर कहलता था !
इसलिए हम 1757 से 1773 तक पढेगे, 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट के तहत गवर्नर का स्थान गवर्नर जनरल ले लेता हैं , फिर 1833 के चार्टर एक्ट में यही बंगाल का गवर्नर जनरल भारत का गवर्नर जनरल कहलायेगा !

लॉर्ड क्लाइव(1757-1760),(1765-1767)

lord clive 

क्लाइव की समस्याएँ
राजनितिक समस्या:- जब क्लाइव दुबारा आया तब उसे पता चला कि पुराने गवर्नर वाँसीटार्ट ने अवध का राज्य मुगल बादशाह को वापस दे देने का वादा किया है!जब क्लाइव को यह पता चला तो उसने अवध के नवाब को प्रस्ताव भेजा  पचास लाख रूपए कंपनी को देना स्वीकार करे तो इलाहाबाद प्रांत को छोड़कर उसकी रियासत उसे वापस कर दी जाएगी।और उसके बाद इलाहाबाद मुगल बादशाह को देकर उसके बदले क्लाइव ने बंगाल की दीवानी माँगी

प्रशासकीय समस्या:- क्लाइव ने बंगाल पहुंचते ही समस्त सिविल और फौजी अफसरों कम्पनी के अधिकारीयों से एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराए, जिससे भेंट लेना प्रतिबंधित कर दिया गया ! भत्ते के संबंध में नए कानून बनाए थे इस कानून के अनुसार सैनिक अफसरों को बंगाल और बिहार में उसी समय भत्ता मिल सकता था जब वे छावनी से बाहर हों।इसके बाद अंग्रेजो ने विद्रोह कर दिया जिसे श्वेत विद्रोह कहा गया


क्लाइव के बारे में कथन
बर्क ने क्लाइव को “ बड़ी बड़ी नीवें रखने वाला कहा हैं”
प्रसीवल स्पीयर ने क्लाइव को “भविष्य का अग्रदूत कहा हैं “
क्लाइव के अंतिम दिन
इंग्लैंड जाने पर उनके ऊपर भ्रष्टाचार का मुकदमा चला, किंतु उससे वह बरी कर दिया गया
और अंतिम में इन्होने आत्म हत्या कर दी

वैनसिटार्ट (1760 – 1764)

क्लाइव को 1760 में वापस बुला लिया गया इसकी जगह बंगाल का गवर्नर हेनरी वैनसिटार्ट को बनाया गया
इसका कार्यकाल 1760 से 1764 तक रहा जिस बीच अक्टूबर 1764 में बक्सर का युद्ध हुआ था हेक्टर मुनरो vs मीर कासिम,शाहालम और ,सुजाऊदौला के बीच में
बक्सर के युद्ध के तुरंत बाद वाँसीटार्ट को पद से हटा दिया था और 1765 में वापस गवर्नर के पद पर लॉर्ड क्लाइव(1765-1767) आ गया !


1767 से 1769 तक वेरेलस्ट आता हैं
1769 से 1772 तक कार्टियर आता हैं


कार्टियर के समय आधुनिक भारत का प्रथम अकाल 1770 में पड़ा

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