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May 14, 2019
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Tuesday, 14 May 2019
Friday, 15 February 2019
संविधान के 22 भाग Indian Constitution 22 Parts
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February 15, 2019
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भारत का संविधान 22 भाग Download PDF
| भाग | नाम | अनुच्छेद |
|---|---|---|
| भाग 1 | संघ एंव राज्य क्षेत्र | 1 से 4 |
| भाग 2 | नागरिकता | 5 से 11 |
| भाग 3 | मौलिक अधिकार | 12 से 35 |
| भाग 4 | निति निदेशक तत्व | 36 से 51 |
| भाग 4क | मूल कर्तव्य | 51क |
| भाग 5 | संघ सरकार | 52 से 151 |
| कार्यपालिका (52-78) | ||
| व्यवस्थापिका (79-122) | ||
| राष्ट्रपति की शक्तियाँ (123) | ||
| न्यायपालिका (124-147) | ||
| CAG(148-151) | ||
| भाग 6 | राज्य सरकार | 152 से 237 |
| परिभाषा (152) | ||
| कार्यपालिका (153-167) | ||
| राज्य विधानमण्डल (168 -212) | ||
| राज्यपाल की शक्तियाँ (213) | ||
| राज्यों का उच्च न्यायालय (214-232) | ||
| अधीनस्थ न्यायालय(233-237) | ||
| भाग 7 | राज्यों का पुनर्गठन (7वें संविधान संसोधन 1956 के द्वारा इसे हटाया गया | 238 |
| भाग 8 | संघ शासित प्रदेश | 239 से 242 |
| भाग 9 | पंचायते | 243 से 243ण |
| भाग 9क | नगरपालिकाएं | 243त से 243यछ |
| भाग 9ख | सहकारी समितियां | |
| भाग 10 | अनुसूचित और जनजातिय क्षेत्र | 244 से 244क |
| भाग 11 | संघ व राज्यों के बीच संबन्ध | 245 से 263 |
| विधायी संबन्ध (245-255) | ||
| प्रशासनिक संबंध (256-263) | ||
| भाग 12 | वित संपंति संविदाएं और वाद | 264 से 300ए |
| वित (264-291) | ||
| ऋण लेना (292-293) | ||
| संविदाएं एंव अधिकार और वाद(294-300) | ||
| संपति का अधिकार (300क -300ए) | ||
| भाग 13 | भारत के राज्य क्षेत्र में व्यापार व वाणिज्य | 301से 307 |
| भाग 14 | संघ और राज्यों के अधिन सेंवाएं | 308 से 323 |
| प्रशासनिक सेवाएं(308-314) | ||
| लोक सेवा आयोग(315-323) | ||
| भाग 14क | अधिकरण | 323क से 323ख |
| भाग 15 | निर्वाचन | 324 से 329क |
| भाग 16 | विशेष प्रावधान | 330 से 342 |
| भाग 17 | राजभाषा | 343 से 351 |
| संघ की भाषा (343-344) | ||
| प्रदेशों की भाषा (345-347) | ||
| न्यायालयों की भाषा(348-349) | ||
| विशेष निदेश (350-351) | ||
| भाग 18 | आपात के उपबंध | 352 से 360 |
| भाग 19 | प्रकीर्ण ( कई तरह के मिश्रित उपबंध | 361 से 367 |
| भाग 20 | संविधान संसोधन | 368 |
| भाग 21 | अस्थायी और विशेष उपबंध | 369 से 392 |
| भाग 22 | संक्षिप्त नाम,हिन्दी मे दिये हुए पाठ और निरसन | 393 से 395 |
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Tuesday, 12 February 2019
भारतीय संविधान की प्रस्तावना
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February 12, 2019
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प्रस्तावना
तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक,आर्थिक और राजनैतिक न्याय
विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतन्त्रता
प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए
तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमां और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करने
वाली बन्धुता बढाने के लिए दृढ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में
आज तारिख 26 जनवरी 1949 ईस्वी (मिति मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमीं संवत् 2006 विक्रमी)
को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगिकृत ,अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं!
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भारतीय संविधान अनुच्छेद 52 से 62 Indian Constitution राष्ट्रपति
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February 12, 2019
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अनुच्छेद 52 से 62 राष्ट्रपति
अनुच्छेद 52: भारत का एक राष्ट्रपति होगा !
अनुच्छेद 53: संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी !
अनुच्छेद 54: राष्ट्रपति का निर्वाचन मंडल !
अनुच्छेद 55: राष्ट्रपति की निर्वाचन पद्धति !
अनुच्छेद 56: राष्ट्रपति की पदावधि !
अनुच्छेद 57: राष्ट्रपति का पुनर्निर्वाचन !
अनुच्छेद 58: राष्ट्रपति पद के लिए योग्यता!
अनुच्छेद 59: राष्ट्रपति पद के लिए सेवा शर्ते !
अनुच्छेद 60: राष्ट्रपति पद के लिए शपथ !
अनुच्छेद 61: राष्ट्रपति के लिए महाभियोग लाना !
अनुच्छेद 62: राष्ट्रपति पद की आकस्मिक रिक्ति पर !
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Monday, 11 February 2019
1909 का भारत शासन अधिनियम
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February 11, 2019
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1909 का मार्ले-मिन्टो सुधार अधिनियम
इस अधिनियम को मार्ले-मिन्टो सुधर अधिनियम भी कहा जाता हैं !क्योंकि उस समय मार्ले भारत सचिव था !
और
मिन्टो तत्कालीन भारत का वायसराय था,
इसलिए इस अधिनियम को मार्ले-मिंटो सुधार अधिनियम कहा जाता हैं !
इस अधिनियम मुख्य रूप से 6 प्रावधान थे !
1. इस अधिनियम के तहत केन्द्रीय और प्रांतीय विधानपरिषद में काफी वृद्धि की गयी केन्द्रीय परिषद् में विधान परिषदों की संख्या 16 से 60 कर दी गयी !
2. इस अधिनियम के तहत विधान परिषदों की शक्तियों में वृद्धि की गयी अब सदस्यों को वार्षिक बजट पर बहस के साथ साथ अपने विचार रख सकते थे प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकते थे प्रश्न पूछ सकते थे!
3. इस अधिनियम के तहत पहली बार भारतियों को वायसराय की कार्यपालिका परिषद् में शामिल किया गया सत्येन्द्र प्रसाद सिन्हा वायसराय की कार्यपालिका के प्रथम भारतीय सदस्य बने!
4. इस अधिनियम के तहत साम्प्रदायिक निर्वाचन की नीव रखी जाती हैं मुस्लिम सदस्यों का चुनाव मुस्लिम मतदाता हि करेगे लार्ड मिन्टो को साम्प्रदायिक निर्वाचन का जनक माना जाता हैं
Monday, 4 February 2019
1892 के भारत शासन अधिनियम 1892 act in hindi
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February 04, 2019
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1892 के भारत शासन अधिनियम में मुख्य तीन प्रावधान थे
1.अप्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली की शुरुआत
2.विधान परिषद् के कार्यों में वृद्धि की गयी बजट पर बहस होना प्रारंभ हो गयी
3.इसमें केन्द्रीय विधानपरिषद में भारतीयों की संख्या कम से कम 10 होगी और अधिकतम 16 होगी !
कथन :- सुरेन्द्रनाथ बनर्जी ने कहा था की इस अधिनियम के द्वारा भारत में संसदीय शासन प्रणाली की शुरुआत मानी जाएगी
1.अप्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली की शुरुआत
2.विधान परिषद् के कार्यों में वृद्धि की गयी बजट पर बहस होना प्रारंभ हो गयी
3.इसमें केन्द्रीय विधानपरिषद में भारतीयों की संख्या कम से कम 10 होगी और अधिकतम 16 होगी !
कथन :- सुरेन्द्रनाथ बनर्जी ने कहा था की इस अधिनियम के द्वारा भारत में संसदीय शासन प्रणाली की शुरुआत मानी जाएगी
Monday, 28 January 2019
भारतीय संविधान अनुच्छेद 36 से 51 Indian Constitution
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January 28, 2019
भाग -4 राज्य के निति निदेशक तत्व
अनुच्छेद 36:- राज्य शब्द परिभाषित- राज्य का अर्थ वही हैं जो अनुच्छेद 12 में हैं
अनुच्छेद 36:- राज्य शब्द परिभाषित- राज्य का अर्थ वही हैं जो अनुच्छेद 12 में हैं
अनुच्छेद 37:- निति निदेशक तत्व वाद योग्य नहीं हैं राज्य नीतियाँ बनाते समय इन्हें ध्यान में रखेगा !
अनुच्छेद 38:- राज्य सभी लोगों को सामाजिक आर्थिक राजनितिक न्याय उपलब्ध करवायेगा!
अनुच्छेद 39:- लोक कल्याणकारी नीतियाँ
(a)राज्य सभी स्त्री पुरुषों को आजीविका के लिए सामान अवसर उपलब्ध करवायेगा!
(b)राज्य मानवीय और भौतिक संसाधनों का इस प्रकार वितरण करेगा की सभी लोगों का कल्याण हो!
(c)राज्य राज्य आर्थिक संसाधनों का वितरण इस प्रकार करेगा की उनका केन्द्रीकरण नही हों
(d)समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जायेगा
(e)राज्य स्त्रियों और पुरुषों को ऐसा कार्य नही करने देगा की जो उनके स्वास्थ्य के खिलाफ हो
(f)राज्य बच्चो को ऐसा वातावरण उपलब्ध करवायेगा जिससे उनका व्यक्तित्व का विकास हो
अनुच्छेद 39क: राज्य सभी लोगों को समान न्याय , निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध करवायेगा !
अनुच्छेद 40: राज्य ग्रामपंचायतो का गठन करेगा !
अनुच्छेद 41: राज्य सभी लोगों को काम,शिक्षा, और लोक व्यवस्था उपलब्ध करवायेगा!
अनुच्छेद 42: राज्य सभी लोगो को मानवोचित दशाएं उपलब्ध करवायेगाऔर प्रसूति सहायता उपलब्ध करवायेगा !
अनुच्छेद 43: राज्य सभी लोगों को जीवन निर्वाह योग्य वेतन उपलब्ध करवायेगा !
अनुच्छेद 44: राज्य सामान नागरिक सहिंता की स्थापना करेगा !
अनुच्छेद 45: राज्य 6 वर्ष से कम बालकों के लिए निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध करवायेगा !
अनुच्छेद 46: राज्य अनुसूचित जाती और जनजाति व समाज के दुर्बल वर्ग के लिए शिक्षा की व्यवस्था करेगा !
अनुच्छेद 47: राज्य के प्राथमिक कर्तव्यो का उल्लेख हैं राज्य मादक पदार्थो पर रोक लगाएगा !
(a) राज्य लोगो के जीवन स्तर में सुधार करेगा !
(b) राज्य लोगो के पोषाहार में सुधार करेगा!
(c) राज्य लोगो के स्वास्थ्य में सुधार करेगा!
अनुच्छेद 48: राज्य कृषि व पशुपालन में सुधार हेतु उन्नत तकनिकी का उपयोग करेगा , राज्य पशुओं विशेषकर गौ हत्या पर रोक लगाएगा !
अनुच्छेद 48A: राज्य पर्यावरण का सरंक्षण करेगा व वन और वन्यजीवों की भी रक्षा करेगा!
अनुच्छेद 49: राज्य का कर्तव्य हैं की वो हमारे विरासतों , एतिहासिक स्मारकों और राष्ट्रिय महत्व के स्थानों को सरंक्षण प्रदान करे !
अनुच्छेद 50: राज्य कार्यपालिका व न्यायपालिका को पृथक करेगा !
अनुच्छेद 51: भारत का विदेश निति का आधार
(a) भारत अंतराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा को बढ़ावा देगा
(b)भारत सभी राष्टों के मध्य सम्मानजनक और न्यायसंगत व्यवहार बढ़ावा देगा !
(c)भारत अंतराष्ट्रीय संधि और समझोते की पालना को बढ़ावा देगा !
(d) भारत चाहता हैं अंतराष्ट्रीय विवादों का समाधान मध्यस्था से हो !
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Saturday, 26 January 2019
भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेद Constitution important article
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January 26, 2019
अनुच्छेद 1 : संघ व राज्य क्षेत्र :- India जो की भारत हैं राज्यों का संघ होगा ना की राज्यों का समूह
अनुच्छेद 2 : नए राज्यों का प्रवेश : भारत के राज्य क्षेत्र में नए राज्यों का प्रवेश अथवा विदेशी राज्य क्षेत्र को भारत में मिलाना
अनुच्छेद 3 : राज्यों के नाम , स्थान , सीमा , क्षेत्र में परिवर्तन
अनुच्छेद 4 : अनुच्छेद 3 व 4 में परिवर्तन करते समय अनुच्छेद 368 की प्रक्रिया से संसोधन नही करना होगा
अनुच्छेद 5 : संविधान निर्माण के समय भारत की नागरिकता
अनुच्छेद 6 : पाकिस्तान से भारत आने वाले व्यक्ति की नागरिकता
अनुच्छेद 7 : 1 मार्च 1947 के बाद पाकिस्तान गया हो और वापस भारत में रहने के बाद नागरिकता
अनुच्छेद 8 : विदेशो में रह रहे भारतीय मूल के नागरिकों की नागरिकता के संबध में
अनुच्छेद 9 : अपनी इच्छा से विदेशी राज्य की नागरिकता अर्जित करने पर भारत से समाप्त नागरिकता
अनुच्छेद 10 : कब कब नागरिकता के अधिकार बने रहेंगे
अनुच्छेद 11 : संसद को अधिकार नागरिकता के संबध में कानून बनाने का
अनुच्छेद 12 : राज्य शब्द को परिभाषित किया गया हैं
अनुच्छेद 13 : विधि शब्द परिभाषित और मूल अधिकारों के अल्पीकरण करने वाली विधियाँ
अनुच्छेद 14 : विधि के समक्ष समानता विधियों का सामान सरंक्षण
अनुच्छेद 15 : जाती ,मूलवंश, धर्म . रंग और लिंग के आधार पर भेदभाव निषेध
अनुच्छेद 16 : लोक नियोजन के विषय में अवसर की समानता
अनुच्छेद 17 : अश्प्र्यता का अंत
अनुच्छेद 18 : उपाधियों का अंत
अनुच्छेद 19 : 6 प्रकार की स्वतंत्रता
a.भाषण व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
b.सभा करने की स्वतंत्रता
c.संघ व संगठन बनाने की
d.भारत में कहीं पर घुमने फिरने की स्वतंत्रता
eभारत में कहीं पर रहने व निवास करने की स्वतंत्रता
f.भारत के राज्य क्षेत्र में कहीं पर व्यापर करने की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 20 :अपराध व दोष सिद्धि के सम्बद्ध में सरंक्षण
a.अपराध के समय जो कानून हो उसी कानून के तहत सजा होगी
b.एक ही अपराध के लिए एक ही सजा होगी
c.खुद के खिलाफ गवाही देने के लिए बाध्य नही किया जायेगा
अनुच्छेद 21: प्राण व दैहिक स्वतंत्रता यां जीवन जीने का अधिकार
अनुच्छेद 22: गिरफ्तारी के विरुद्ध सरंक्षण
a.गिरफ्तारी के कारण जानने का अधिकार
b.अपने अनुसार विधि सलाहकार चुनने का अधिकार
c.24 घंटे के अन्दर नजदीकी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जायेगा
अनुच्छेद 23: बलात श्रम,सागडी प्रथा , बंधुआ मजदूरी व मानव व्यापर पर रोक
अनुच्छेद 24: बाल श्रम ( 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चो से कारखानों में कार्य करवाने पर प्रतिबन्ध
अनुच्छेद 25: किसी भी व्यक्ति को अपने धर्म को मानने उसके अनुरूप आचरण करने , उसका प्रचार प्रसार करने व अंतकरण की स्वतंत्रता होगी
अनुच्छेद 26: किसी भी व्यक्ति को धार्मिक संस्था स्थापित करने और उसका प्रबन्धन करने का अधिकार होगा
अनुच्छेद 27: किसी एक धर्म को बढ़ावा देने के लिए किसी भी व्यक्ति को धार्मिक कर देने के लिए बाध्य नही किया जायेगा
अनुच्छेद 28: किसी भी शैक्षणिक संस्थान में धार्मिक शिक्षा नही दी जाएगी
अनुच्छेद 29: अल्पसंख्यको के हितों की रक्षा उनकी भाषा ,लिपि , व संस्कृति को बचाए रखने का अधिकार
अनुच्छेद 30: सभी अल्पसंख्यकों को अपनी धार्मिक शिक्षण संस्थानों को खोलने व उनका सञ्चालन और प्रबन्धन करने का अधिकार होगा
अनुच्छेद 31 : सम्पति का अधिकार था 42वें संविधान संसोधन के तहत समाप्त कर दिया और विधिक अधिकार बना दिया
अनुच्छेद 31A
अनुच्छेद 31B
अनुच्छेद 31C
अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचारों का अधिकार न्यायायल को 5 प्रकार की रिट जारी करने का अधिकार
a.बंदी प्रत्यक्षीकरण -हेबियस कारपस ( उपस्थित किया जाये )
b.परमादेश -मांडामस (हम आदेश देते हैं
c.प्रतिषेद- प्रोहिबिशन (आपके अधिकार क्षेत्र में नही हैं )
d.उत्प्रेषण- सेरिसरी( निम्न न्यायालयों को आदेश
e.अधिकार पृछा -को वारंटो (किस अधिकार से
अनुच्छेद 33: सैन्य , पुलिस b IB के लिए संसद कानून बनाकर मूल अधिकारों में कमी कर सकती हैं
अनुच्छेद 34: मार्शल लॉ लग जाने पर मूल अधिकारों में हुई कमी को संसद कानून बनाकर क्षतिपूर्ति कर सकती हैं
अनुच्छेद 35: मूल अधिकारों के संदर्भ में कानून बनाने का अधिकार केवल संसद को हैं किसी भी विधान मंडल को नहीं हैं
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Tuesday, 22 January 2019
1858 का भारत शासन अधिनियम
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January 22, 2019
1858 का भारत शासन अधिनियम
1857 की क्रांति के बाद यह महत्वपूर्ण अधिनियम था, इस अधिनियम को भारत के शासन को अच्छा बनाने वाला अधिनियम भी कहा जाता है !
इस अधिनियम में मुख्य रूप से 3 प्रावधान थे !
1.इस अधिनियम के तहत ईस्ट इंडिया कंपनी को समाप्त कर दिया और भारत का शासन सीधे महारानी विक्टोरिया के अधीन चला गया था !
2.गवर्नर जनरल का पद बदल कर उसकी जगह भारत का वायसराय का पद कर दिया गया और यह सरकार का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि बन गया !और प्रथम वायसराय लार्ड केनिंग था !
3.इसी अधिनियम के तहत नियंत्रण बोर्ड (Board of Cantrol) और निदेशक मंडल (Board of Directors) इन दोनों को समाप्त कर दिया था अर्थात भारत में द्वैध शासन प्रणाली समाप्त कर दी थी !और इसकी जगह एक नया पद आया जिए भारत सचिव कहा जाता था , यह भारत सचिव ब्रिटिश मंत्रिमंडल का सदस्य होता था जिसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय भारतीय परिषद का गठन भी किया गया !
Monday, 21 January 2019
1853 का चार्टर अधिनियम
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January 21, 2019
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1853 का चार्टर अधिनियम
इस अधिनियम की मुख्य रूप से चार प्रावधान थे
1.इस अधिनियम के तहत जो भारत का गवर्नर जनरल था उसके विधायी और प्रशासनिक कार्य अलग-अलग कर दिए थे
- विधायी अर्थात कानून बनाना!
- प्रशासनिक मतलब कानून को चलाना!
2.भारत में विधान परिषद का गठन इसी अधिनियम के तहत माना जाता है इसमें छ सदस्य होते थे जिन्हें विधान पार्षद कहा जाता था और यह एक तरह से छोटी संसद की तरह कार्य करती थी !
3.इसी अधिनियम के तहत सिविल सेवकों की भर्ती एवं चयन हेतु खुली प्रतियोगिता व्यवस्था का शुभारंभ हुआ और इसके लिए 1854 में मैकाले समिति की नियुक्ति की गई !
4.इस अधिनियम के तहत भारतीयों को केंद्रीय विधान परिषद में स्थाई प्रतिनिधित्व मिला और इसमें जो सदस्य थे वह तो बंगाल से था एक मद्रास से था एक मुंबई और आगरा यहां चार प्रांतों से 4 सदस्य मनोनीत किए गए थे !
1833 का चार्टर एक्ट
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January 21, 2019
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1833 का चार्टर एक्ट
भारत पर ब्रिटिशों के केंद्रीयकरण की दशा में यह अधिनियम निर्णायक था।इस अधिनियम में मुख्य रूप से 5 प्रावधान थे।1.1833 के इस चार्टर एक्ट के तहत बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल बना दिया। जिसके पास सभी सैनिक व नागरिक शक्तियां थी तथा भारत के प्रथम गवर्नर जनरल लार्ड विलियम बैंटिग थें।
2.इसी एक्ट के तहत ईस्ट इंडिया कम्पनी से व्यापारिक अधिकार समाप्त करके उसको एक विशुद्व रूप से प्रशासनिक निकाय बना दिया। अर्थात 1833 से पहले कम्पनी के पास राजनैतिक अधिकार और व्यापारिक अधिकार दोनों थे!
3.1833 के इसी चार्टर के तहत 1773 में 4 सदस्यों की परिषद थी उनकी संख्या 1803 के एक्ट में 3 कर दी गयी लेकिन इस एक्ट में वापस उन सदस्यों की संख्या 4 कर दी गयी और चौथे सदस्य को विधि सदस्य के रूप में शामिल किया गया।
4.1833 के इसी एक्ट के तहत 1834 में लॉर्ड मैकाले कि अध्यक्षता में विधि आयोग का गठन किया गया।
5. 1833 के इसी एक्ट के तहत भारत के गवर्नर जनरल को पूरे ब्रिटिश भारत के लिए कानुन बनाने के असीमित अधिकार प्रदान कर दिये गये।
Sunday, 20 January 2019
1784 का पिट्स इंडिया एक्ट और 1781 का एक्ट ऑफ़ सेटलमेंट
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January 20, 2019
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1784 का पिट्स इंडिया एक्ट
1773 के रेगुलेटिंग एक्ट की कमियों को दूर करने के लिए 1781 में एक्ट ऑफ़ सेटलमेंट लाया गया जिसको 1784 में तत्कालिन ब्रिटिश प्रधानमंत्री विलियम पिट द्वारा 1784 में पुनः संसोधित किया इसलिए इसे 1784 का पिट्स इंडिया एक्ट कहा गया।

इस अधिनियम में 3 प्रावधान थे।
1.व्यापारिक और राजनैतिक कार्य पृथक-पृथक(अलग- अलग ) कर दिये।
2.व्यापारिक कार्यो के संचालन या देख-रेख के लिए तो पहले से ही निदेशक मण्डल अर्थात Board of Director था ही लेकिन अब राजनैतिक कार्यो पर नियंत्रण के लिए नियंत्रण बोर्ड अर्थात Board of Cantrol का गठन भी अलग से किया गया।
3.इस एक्ट के तहत बोर्ड ऑफ़ कन्ट्रोल को ब्रिटिश सरकार के अधिन आने वाले भारतीय नागरिक,सैन्य,सरकार और राजस्व पर नियंत्रण की शक्ति दी गयी।
इस प्रकार इस अधिनियम के तहत 2 मुख्य बदलाव हुए
i ).कम्पनी पर पुर्ण नियंत्रण ब्रिटिश सरकार का हो गया।
ii ).भारत के कम्पनी का अधिकार क्षेत्र ब्रिटिश अधिपत्य क्षेत्र कहलाने लगा।
भारत की राजव्यवस्था ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और 1773 का रेग्युलेटिंग एक्ट
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January 20, 2019
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भारत की राजव्यवस्था ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1757 के प्लासी के युद्व,1764 के बक्सर के युद्व और 1765 की इलाहबाद की संधि के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी का भारत पर व्यापारिक अधिकार के साथ-साथ राजनैतिक अधिकार भी स्थापित हो गया। और कम्पनी ब्रिटिश सरकार पर हावी होने लगी , हावी होते देख ब्रिटिश सरकार ने कम्पनी पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए कई एक्ट बनाये ।
1773 का रेग्युलेटिंग एक्ट
प्रशासनिक और राजनैतिक नियंत्रण के लिए 1773 का एक्ट ब्रिटिश सरकार का पहला प्रयास था।
1773 के रेग्युलेटिंग एक्ट को नियामक अधिनियम भी कहते हैं।
इस अधिनियम में 5 प्रावधान थे।
1.बंगाल के गवर्नर को बंगाल का गवर्नर जनरल बना दिया तथा प्रथम गवर्नर जनरल वॉरेन हैस्टिंग्स हुआ,और इसकी सहायता के लिए 4 सदस्यों की एक परिषद का भी गठन किया गया।
2.मद्रास और बम्बई प्रेसीडेन्सी के गवर्नरों को बंगाल के गवर्नर जनरल के अधीन कर दिया।पहले तीनों प्रेसीडेन्सीयों के गवर्नरों का अलग अलग अपना क्षेत्राधिकार होता था।
3.उच्चतम न्यायालय की स्थापना इसी 1773 के रेग्युलेटिंग एक्ट के तहत 1774 में कलकता में की गयी जिसमें 1 मुख्य न्यायधीश और तीन न्यायाधीशों का प्रावधान था और इसके प्रथम न्यायाधीश एलिजा इम्पै थी
4.ब्रिटिश कर्मचारियों का निजी व्यापार करना उपहार लेना यह सब इस एक्ट के तहत प्रतिबंधित कर दिया।
5.ब्रिटिश सरकार द्वारा कोर्ट ऑफ़ डायरेक्टर्स को नियुक्त किया जो कम्पनी के कार्यो की जानकारी ब्रिटिश सरकार को देते थे ,इसके तहत कम्पनी पर नियंत्रण कठोर हो गया!
इस प्रकार 1773 के रेग्युलेंटिग में निम्न प्रावधान थे इस एक्ट की कमियों को दूर करने के लिए 1781 में एक्ट ऑफ़ सेटलमेन्ट लाया गया।
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