Dharma Web Net
January 28, 2019
Showing posts with label india history. Show all posts
Showing posts with label india history. Show all posts
Monday, 28 January 2019
Adhunik Bharat ka itihas यूरोपीय कम्पनियों का आगमन पुर्तगीज(पुर्तगाली)
मुख्य मार्ग : 1 फारस की खाड़ी से इराक -} तुर्की -} भूमध्य सागर -} वेनिस (इटली ) स्विज़रलैंड (जेनेवा)
पुर्तगीज सर्वप्रथम भारत आये
धार्मिक असहिषणुता –भारतीय शक्तियों से शत्रुता
धार्मिक परिणाम : धर्म परिवर्तन को बढ़ावा ,गोवा में मन्दिर नष्ट किये ,तथा ईसाई धर्म न्यायालय की स्थापना
watch this Video
Tags
adhunik bharat,
india history,
New
Wednesday, 23 January 2019
बंगाल के गवर्नर 1757-1773 adhunik bharat ka itihas
Dharma Web Net
January 23, 2019
बंगाल के गवर्नर 1757-1773
1757 में प्लासी के युद्ध से ही ब्रिटिश ईस्ट इंडिया की कंपनी का राजनैतिक हस्तक्षेप माना जाता हैं ,
1773 के रेगुलेटिंग एक्ट से पहले गवर्नर जनरल नही केवल गवर्नर कहलाता था और शासन बंगाल पर था तो बंगाल का गवर्नर कहलता था !
इसलिए हम 1757 से 1773 तक पढेगे, 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट के तहत गवर्नर का स्थान गवर्नर जनरल ले लेता हैं , फिर 1833 के चार्टर एक्ट में यही बंगाल का गवर्नर जनरल भारत का गवर्नर जनरल कहलायेगा !
लॉर्ड क्लाइव(1757-1760),(1765-1767)
| lord clive |
क्लाइव की समस्याएँ
राजनितिक समस्या:- जब क्लाइव दुबारा आया तब उसे पता चला कि पुराने गवर्नर वाँसीटार्ट ने अवध का राज्य मुगल बादशाह को वापस दे देने का वादा किया है!जब क्लाइव को यह पता चला तो उसने अवध के नवाब को प्रस्ताव भेजा पचास लाख रूपए कंपनी को देना स्वीकार करे तो इलाहाबाद प्रांत को छोड़कर उसकी रियासत उसे वापस कर दी जाएगी।और उसके बाद इलाहाबाद मुगल बादशाह को देकर उसके बदले क्लाइव ने बंगाल की दीवानी माँगी
प्रशासकीय समस्या:- क्लाइव ने बंगाल पहुंचते ही समस्त सिविल और फौजी अफसरों कम्पनी के अधिकारीयों से एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराए, जिससे भेंट लेना प्रतिबंधित कर दिया गया ! भत्ते के संबंध में नए कानून बनाए थे इस कानून के अनुसार सैनिक अफसरों को बंगाल और बिहार में उसी समय भत्ता मिल सकता था जब वे छावनी से बाहर हों।इसके बाद अंग्रेजो ने विद्रोह कर दिया जिसे श्वेत विद्रोह कहा गया
क्लाइव के बारे में कथन
बर्क ने क्लाइव को “ बड़ी बड़ी नीवें रखने वाला कहा हैं”
प्रसीवल स्पीयर ने क्लाइव को “भविष्य का अग्रदूत कहा हैं “
क्लाइव के अंतिम दिन
इंग्लैंड जाने पर उनके ऊपर भ्रष्टाचार का मुकदमा चला, किंतु उससे वह बरी कर दिया गया
और अंतिम में इन्होने आत्म हत्या कर दी
वैनसिटार्ट (1760 – 1764)
क्लाइव को 1760 में वापस बुला लिया गया इसकी जगह बंगाल का गवर्नर हेनरी वैनसिटार्ट को बनाया गयाइसका कार्यकाल 1760 से 1764 तक रहा जिस बीच अक्टूबर 1764 में बक्सर का युद्ध हुआ था हेक्टर मुनरो vs मीर कासिम,शाहालम और ,सुजाऊदौला के बीच में
बक्सर के युद्ध के तुरंत बाद वाँसीटार्ट को पद से हटा दिया था और 1765 में वापस गवर्नर के पद पर लॉर्ड क्लाइव(1765-1767) आ गया !
1767 से 1769 तक वेरेलस्ट आता हैं
1769 से 1772 तक कार्टियर आता हैं
कार्टियर के समय आधुनिक भारत का प्रथम अकाल 1770 में पड़ा
Tags
adhunik bharat,
india history
Tuesday, 22 January 2019
पुरन्दर की संधि मिर्जा राजा जय सिंह vs शिवाजी
Dharma Web Net
January 22, 2019
पुरन्दर की संधि मिर्जा राजा जय सिंह vs शिवाजी
मुग़ल शासक शाहजहाँ की मृत्यु के बाद दिल्ली का शासक औरंगजेब बनता हैं
औरंगजेब का समय 1659 -1707 ई.
औरंगजेब के समकालीन मराठा साम्राज्य के शासक छत्रपति शिवाजी थे
जो औरंगजेब की हिन्दू विरोधी नीतियों और मुगलों के प्रतिद्वंदी थे
औरंगजेब के दरबार में आमेर के राजा “ मिर्जा राजा जयसिंह” मनसबदार /सेनापति थे !
औरंगजेब ने मिर्ज़ा राजा जय सिंह को शिवाजी के विरुद्ध अधीनता स्वीकार करवाने के लिए अभियान में भेजा!
यह अभियान सितम्बर 1664 में मिर्ज़ा जय सिंह और दिलेर खां के नेतृत्व में जाता हैं !
लेकिन शिवाजी ने अधीनता स्वीकार न करते हुए युद्ध किया और हार नहीं मानी!
अंततः 2 महीने संघर्ष के बाद औरंगजेब की अधीनता स्वीकार करने के लिए
मिर्ज़ा राजा जय सिंह ने शिवाजी को राजी कर लिया और
1 जून 1665 को मिर्ज़ा राजा जय सिंह और शिवाजी के बीच एक संधि होती हैं इसे हि पुरंदर की संधि कहते हैं
पुरंदर की संधि की निम्न शर्ते थी:
शिवाजी के पास 35 दुर्ग थे उनमे से 23 दुर्ग मुगलों को छोंप दिए केवल 12 दुर्ग अपने पास रहे
संभाजी (जो शिवाजी के पुत्र थे ) को मुग़ल दरबार का मनसबदार बनाया जायेगा और उन्हें 5000 मनसब दिया जायेगा
ठीक इसके विपरीत शिवाजी की भी कुछ शर्ते थी
शिवाजी स्वयं मुग़ल दरबार में उपस्थित नही होंगे लेकिन अगर शिवाजी को आमंत्रित किया जाये तब उपस्थित होना पड़ेगा
दूसरी शर्त में शिवाजी ने कोंकण प्रदेश जो 4 लाख हूण का था ,बालाघात प्रदेश 5 लाख हूण का था और बीजापुर का इल्लाका
यह अगर दे देते हैं तो इसके बदले में बादशाह को 40 लाख हूण 13 किस्तों में दी जायेगी
1858 का भारत शासन अधिनियम
Dharma Web Net
January 22, 2019
1858 का भारत शासन अधिनियम
1857 की क्रांति के बाद यह महत्वपूर्ण अधिनियम था, इस अधिनियम को भारत के शासन को अच्छा बनाने वाला अधिनियम भी कहा जाता है !
इस अधिनियम में मुख्य रूप से 3 प्रावधान थे !
1.इस अधिनियम के तहत ईस्ट इंडिया कंपनी को समाप्त कर दिया और भारत का शासन सीधे महारानी विक्टोरिया के अधीन चला गया था !
2.गवर्नर जनरल का पद बदल कर उसकी जगह भारत का वायसराय का पद कर दिया गया और यह सरकार का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि बन गया !और प्रथम वायसराय लार्ड केनिंग था !
3.इसी अधिनियम के तहत नियंत्रण बोर्ड (Board of Cantrol) और निदेशक मंडल (Board of Directors) इन दोनों को समाप्त कर दिया था अर्थात भारत में द्वैध शासन प्रणाली समाप्त कर दी थी !और इसकी जगह एक नया पद आया जिए भारत सचिव कहा जाता था , यह भारत सचिव ब्रिटिश मंत्रिमंडल का सदस्य होता था जिसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय भारतीय परिषद का गठन भी किया गया !
Monday, 21 January 2019
1853 का चार्टर अधिनियम
Dharma Web Net
January 21, 2019
0
1853 का चार्टर अधिनियम
इस अधिनियम की मुख्य रूप से चार प्रावधान थे
1.इस अधिनियम के तहत जो भारत का गवर्नर जनरल था उसके विधायी और प्रशासनिक कार्य अलग-अलग कर दिए थे
- विधायी अर्थात कानून बनाना!
- प्रशासनिक मतलब कानून को चलाना!
2.भारत में विधान परिषद का गठन इसी अधिनियम के तहत माना जाता है इसमें छ सदस्य होते थे जिन्हें विधान पार्षद कहा जाता था और यह एक तरह से छोटी संसद की तरह कार्य करती थी !
3.इसी अधिनियम के तहत सिविल सेवकों की भर्ती एवं चयन हेतु खुली प्रतियोगिता व्यवस्था का शुभारंभ हुआ और इसके लिए 1854 में मैकाले समिति की नियुक्ति की गई !
4.इस अधिनियम के तहत भारतीयों को केंद्रीय विधान परिषद में स्थाई प्रतिनिधित्व मिला और इसमें जो सदस्य थे वह तो बंगाल से था एक मद्रास से था एक मुंबई और आगरा यहां चार प्रांतों से 4 सदस्य मनोनीत किए गए थे !
1833 का चार्टर एक्ट
Dharma Web Net
January 21, 2019
0
1833 का चार्टर एक्ट
भारत पर ब्रिटिशों के केंद्रीयकरण की दशा में यह अधिनियम निर्णायक था।इस अधिनियम में मुख्य रूप से 5 प्रावधान थे।1.1833 के इस चार्टर एक्ट के तहत बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल बना दिया। जिसके पास सभी सैनिक व नागरिक शक्तियां थी तथा भारत के प्रथम गवर्नर जनरल लार्ड विलियम बैंटिग थें।
2.इसी एक्ट के तहत ईस्ट इंडिया कम्पनी से व्यापारिक अधिकार समाप्त करके उसको एक विशुद्व रूप से प्रशासनिक निकाय बना दिया। अर्थात 1833 से पहले कम्पनी के पास राजनैतिक अधिकार और व्यापारिक अधिकार दोनों थे!
3.1833 के इसी चार्टर के तहत 1773 में 4 सदस्यों की परिषद थी उनकी संख्या 1803 के एक्ट में 3 कर दी गयी लेकिन इस एक्ट में वापस उन सदस्यों की संख्या 4 कर दी गयी और चौथे सदस्य को विधि सदस्य के रूप में शामिल किया गया।
4.1833 के इसी एक्ट के तहत 1834 में लॉर्ड मैकाले कि अध्यक्षता में विधि आयोग का गठन किया गया।
5. 1833 के इसी एक्ट के तहत भारत के गवर्नर जनरल को पूरे ब्रिटिश भारत के लिए कानुन बनाने के असीमित अधिकार प्रदान कर दिये गये।
Sunday, 20 January 2019
1784 का पिट्स इंडिया एक्ट और 1781 का एक्ट ऑफ़ सेटलमेंट
Dharma Web Net
January 20, 2019
0
1784 का पिट्स इंडिया एक्ट
1773 के रेगुलेटिंग एक्ट की कमियों को दूर करने के लिए 1781 में एक्ट ऑफ़ सेटलमेंट लाया गया जिसको 1784 में तत्कालिन ब्रिटिश प्रधानमंत्री विलियम पिट द्वारा 1784 में पुनः संसोधित किया इसलिए इसे 1784 का पिट्स इंडिया एक्ट कहा गया।

इस अधिनियम में 3 प्रावधान थे।
1.व्यापारिक और राजनैतिक कार्य पृथक-पृथक(अलग- अलग ) कर दिये।
2.व्यापारिक कार्यो के संचालन या देख-रेख के लिए तो पहले से ही निदेशक मण्डल अर्थात Board of Director था ही लेकिन अब राजनैतिक कार्यो पर नियंत्रण के लिए नियंत्रण बोर्ड अर्थात Board of Cantrol का गठन भी अलग से किया गया।
3.इस एक्ट के तहत बोर्ड ऑफ़ कन्ट्रोल को ब्रिटिश सरकार के अधिन आने वाले भारतीय नागरिक,सैन्य,सरकार और राजस्व पर नियंत्रण की शक्ति दी गयी।
इस प्रकार इस अधिनियम के तहत 2 मुख्य बदलाव हुए
i ).कम्पनी पर पुर्ण नियंत्रण ब्रिटिश सरकार का हो गया।
ii ).भारत के कम्पनी का अधिकार क्षेत्र ब्रिटिश अधिपत्य क्षेत्र कहलाने लगा।
भारत की राजव्यवस्था ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और 1773 का रेग्युलेटिंग एक्ट
Dharma Web Net
January 20, 2019
0
भारत की राजव्यवस्था ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1757 के प्लासी के युद्व,1764 के बक्सर के युद्व और 1765 की इलाहबाद की संधि के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी का भारत पर व्यापारिक अधिकार के साथ-साथ राजनैतिक अधिकार भी स्थापित हो गया। और कम्पनी ब्रिटिश सरकार पर हावी होने लगी , हावी होते देख ब्रिटिश सरकार ने कम्पनी पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए कई एक्ट बनाये ।
1773 का रेग्युलेटिंग एक्ट
प्रशासनिक और राजनैतिक नियंत्रण के लिए 1773 का एक्ट ब्रिटिश सरकार का पहला प्रयास था।
1773 के रेग्युलेटिंग एक्ट को नियामक अधिनियम भी कहते हैं।
इस अधिनियम में 5 प्रावधान थे।
1.बंगाल के गवर्नर को बंगाल का गवर्नर जनरल बना दिया तथा प्रथम गवर्नर जनरल वॉरेन हैस्टिंग्स हुआ,और इसकी सहायता के लिए 4 सदस्यों की एक परिषद का भी गठन किया गया।
2.मद्रास और बम्बई प्रेसीडेन्सी के गवर्नरों को बंगाल के गवर्नर जनरल के अधीन कर दिया।पहले तीनों प्रेसीडेन्सीयों के गवर्नरों का अलग अलग अपना क्षेत्राधिकार होता था।
3.उच्चतम न्यायालय की स्थापना इसी 1773 के रेग्युलेटिंग एक्ट के तहत 1774 में कलकता में की गयी जिसमें 1 मुख्य न्यायधीश और तीन न्यायाधीशों का प्रावधान था और इसके प्रथम न्यायाधीश एलिजा इम्पै थी
4.ब्रिटिश कर्मचारियों का निजी व्यापार करना उपहार लेना यह सब इस एक्ट के तहत प्रतिबंधित कर दिया।
5.ब्रिटिश सरकार द्वारा कोर्ट ऑफ़ डायरेक्टर्स को नियुक्त किया जो कम्पनी के कार्यो की जानकारी ब्रिटिश सरकार को देते थे ,इसके तहत कम्पनी पर नियंत्रण कठोर हो गया!
इस प्रकार 1773 के रेग्युलेंटिग में निम्न प्रावधान थे इस एक्ट की कमियों को दूर करने के लिए 1781 में एक्ट ऑफ़ सेटलमेन्ट लाया गया।
Post Top Ad
Your Ad Spot






